बुधवार, 14 जनवरी 2009

धरती के गीत



(प्रस्तुत गीत का प्रसारण दूरदर्शन केन्द्र ,पलामू द्वारा २ जुलाई २००३ को किया गया )

गीत बदरी के छन -छन निहार लिखलीं
प्रीत धरती से लेके उधार लिखलीं
कबो अंचरा के ओरहन नयनवां कहे ,
कबो कजरा के कोरवा में लोरवा बहे ,
कबो अदरा के जतरा विचार लिखलीं ।
कहीं कुहुके कोइलि, पपिहरा बोले ,
कहीं झींगुर के शहनाई मधुरस घोले,
कबो रिमझिम फुहार के बहार लिखलीं।
कहीं बूडत नदी के किनारा मिलल ,
कहीं जूझत नैया के सहारा मिलल,
कबो माझी ,भंवर ,मझधार लिखलीं।
कहीं कोमल कलाई के चूड़ी चूमे ,
कहीं मोरवा के संगे -संगे मोरिनिया घूमे,
कबो कजरी आ कबहूँ मल्हार लिखलीं ।
रंग बदलत बा मौसम कई रूप में ,
छाँव में कबहूँ सूरज कबो धुप में ,
हर कदम कहीं जीत कहीं हार लिखलीं ।
-नथुनी पाण्डेय 'आजाद'-